एक कदम सफलता की ओर✌️


सफलता को अपनी भीख नहीं, अधिकार बनाना है
     उसे पाने के लिए हर चुनौती से टकराना है
     मंजिल मिलेगी जरूर हमने अब ये ठाना हैं
      मुश्किलों से अब काहे घबराना है
      जब तय कर लिया हो रास्ता अपना
       राह के पत्थर को भी गले से लगाना है।।

आपकी मेरी या यूं कहिए हम सब में से बहुत लोगों की आदत हैं ये किसी चीज़ को पाने के लिए प्रयत्न करना, कठिन प्रयास करना पर अंत में असफल होकर उसे छोड़ देना। हम में से ज़्यादातर लोग यहीं तो करते हैं एक बार कोशिश की नाकामयाब हुए फिर थोड़ा करने की कोशिश की फिर से नाकामयाबी मिली थक हार कर फिर थोड़ा उठने की कोशिश की मगर इस बार भी नाकामयाबी ही हाथ आयी और अन्ततः हमने कोशिश ही छोड़ दी। मान लिया कि भई जो होना था हो गया अब और कोशिश करना बेकार है।

हम सब ऐसे हजारों सवालों से घिरे हुए हैं अपने मन के भीतर न जाने कितनी बेड़ियों में खुद को जकड़े हुए हैं। जब हर बार असफलता ही हाथ आनी है तो ये प्रयत्न किसलिए फिर? अब बहुत कोशिश कर चुके अब और नहीं? क्या मिला इतनी मेहनत इतनी कोशिशों के बाद? अब हमसे नहीं हो पाएगा?
न जाने ऐसे अनगिनत ख्यालों का विचारों का शिकार हैं आदमी। कभी-कभी हमारे यहीं विचार हमें इतना कमजोर इतना लाचार कर देते हैं कि हम अपना संतुलन ही खो बैठते हैं। हम नहीं समझ पाते हम आखिर ज़िन्दगी से चाहते क्या हैं? ये कठिनाइयां ये परेशानियां हमारे ही हिस्से आखिर क्यों? ऐसे बहुत से सवाल है जो हमें अन्दर ही अन्दर खा जाते हैं।
हम सब इन सवालों का कहीं न कहीं ,किसी न किसी क्षेत्र में शिकार होते ही हैं। पर कभी हमने ये सोचने की कोशिश की है कि आखिर ऐसा होता क्यूं है? क्या वजह है जो इतनी कोशिशों के बावजूद भी हमें जो चाहिए वो अब भी हमसे बहुत दूर नज़र आता हैं। ऐसा भी तो हो सकता है ना कि हमने कभी इतनी गहराई में जाने की कोशिश ही ना कि हो! 

        मेरा हमेशा से अपना ये मानना रहा है कि चाहे कुछ भी हो पर मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। हां कुछ लोगों को कामयाबी थोड़ा उलझाए जरूर रखती हैं कदम-कदम पे उनका इम्तिहान लेती है, उन्हें तराशती है हर कदम ताकि हीरा अपने वास्तविक मोल को पहचान सके। और वैसे भी वो कहते हैं ना कि हारने के बाद जीतने का मज़ा ही कुछ और होता हैं, तभी हमें जीत की अहमियत समझ आती हैं। सफलता अगर प्रथम प्रयास में ही मिल जाए तो अहंकारी बनाती हैं। असफलता का जीवन में क्या महत्व है इन सबसे दूर ले जाती हैं। असफलता हमें हमारे प्रयासों में कहां और कैसे कमी रह गई ये बताती हैं। हमें मेहनत का वास्तविक अर्थ तो असफलता सिखाती हैं। जब तक हम जीवन में असफलता का स्वाद नहीं चख लेते हम सफलता का आनन्द नहीं ले सकते।
असफलता हमें हमारी कमियों को दिखाती है उन्हें सुधारने का मौका देती हैं ,हमारा हमारी गलतियों से सामना कराती हैं ताकि हम उन गलतियों से सीख सकें और खुद को भविष्य के लिए और भी दृढ़ बना सके।

जीवन में कुछ भी असम्भव नहीं है और ऐसा कुछ भी नहीं है जो हम एक बार ठान लें तो नहीं कर सकते। अगर हमारा दिमाग इस बात को स्वीकार कर लें और मन खुद को तैयार कर लें हर मुश्किलों से लड़ने के लिए तो हम वो सब कर सकते हैं जो हम चाहते हैं। हार या जीत हमारी सोच पर निर्भर करती हैं। हारने के बाद भी हममें अगर जीतने का ज़ज़्बा बाकि है तो जीत अगले क्षण निश्चित ही हमारी होगी। 


हम सब सफलता की कहानियां पढ़ते हैं। पर कभी हमने ये सोचा है या कोशिश भी की है सोचने की कि सफलता कभी किसी को तोहफे में नहीं मिली उसके लिए कितनी मेहनत कितनी मुश्किलों , कितनी चुनौतियों से गुजरा है हर वो शख्स जिनकी कहानियां हम सुनते आए हैं या पढ़ते आए हैं बचपन से। अगर नहीं सोचा कभी आपने तो एक बार सोचिएगा जरूर, फिर विचार कीजिएगा आप कहां पर गलत है।

धैर्य, विश्वास, दृढ़ संकल्प और चुनौतियों का सामना करने की हमारी प्रबल इच्छाशक्ति ही हमें हमारी मंजिल तक पहुंचाती हैं। कठिनाइयां जितनी रास्ते में अधिक आएंगी उतना ही आनंद जीत का प्राप्त होगा।

एक प्रसिद्ध कहावत भी तो है कि-
     मन के हारे हार है....
                मन के जीते जीत

  प्रबल इच्छाशक्ति का होना आवश्यक ही नहीं अपितु अनिवार्य भी है। हमारा सफलता के प्रति दृढ़ संकल्प ही हमारी विजय की प्रथम सीढ़ी है। असफलता को अपनी कमजोरी नहीं अपनी सफलता तक जाने का रास्ता बनाना है और इस रास्ते हमें खुद ही चलना पड़ेगा। 



    



Comments

  1. सही कहा। मेर पिता बचपन में ये दोहा हमेशा हमें सुनाया करते थे

    करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।
    रसरी आवत जात ते सिल पर परत निसान।।

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  2. Definitely. .....Hard work is the key of success....😊
    Kuch paane ki chah ho aur usey haasil krne ka zazba toh jeet pakki h✌👌

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